हम हैं जंगल के दावेदार, ना समझी हिस्सेदार
ग्राम सभा मंच, प्रखण्ड समिति, कुचाई
सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन हेतु अपील
जोहार, वन प्रेमियों!
वनों पर अधिकारों की मान्यता के लिए हमारा संघर्ष रंग लाया, और 2006 में “अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकार) अधिनियम” लागू हुआ। इससे पहले, सरकार और वन विभाग ने हमारे समुदायों के साथ कई अन्याय किए थे, जिन्हें इस अधिनियम के तहत सुधारने का प्रयास किया गया है।
ग्राम सभा को मिला अधिकार
इस अधिनियम की धारा 3(झ) के तहत सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, पुनरुज्जीवन और प्रबंधन का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है। लेकिन वन विभाग ने वन संरक्षण और विकास के नाम पर जंगलों का दोहन किया, जिससे हमारी आजीविका, पारंपरिक संस्कृति, जल स्रोत, पर्यावरण और जैव विविधता खतरे में पड़ गए हैं।
हमारी जिम्मेदारी – जंगल की सुरक्षा
हम, ग्राम सभा के वन प्रेमी, शपथ लेते हैं कि आदिवासी अस्तित्व, जैव विविधता और पर्यावरण की रक्षा के लिए अब वन विभाग पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि जंगल को अपने हाथों से संभालेंगे। पेसा अधिनियम, 1996 भी यही कहता है कि वन संसाधनों का संरक्षण ग्राम सभा ही करेगी।
महत्वपूर्ण निर्णय और नियम
1. जंगलों में आग नहीं लगाएंगे
महुआ चुनने के नाम पर जंगल में आग लगाना सख्त मना होगा।
अगर कोई आग लगाते हुए या चोरी करते पकड़ा गया, तो उसे आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक दंड दिया जाएगा।
2. दूसरे ग्राम सीमा में जंगल जलाने पर जुर्माना
अगर कोई व्यक्ति दूसरे ग्राम की सीमा में जंगल में आग लगाता पाया गया, तो उस पर ₹5000 से ₹10,000 तक जुर्माना लगाया जाएगा।
3. अवैध कटाई और चोरी पर प्रतिबंध
ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र से लकड़ी या वन संसाधन काटना या चोरी करना सख्त वर्जित होगा।
यदि कोई ऐसा करता पाया गया, तो उस पर कठोर दंड लगाया जाएगा।
4. लकड़ी की बिक्री पर रोक
किसी भी ग्राम सभा के चिन्हित जंगल से लकड़ी बेचने की अनुमति नहीं होगी।
यदि किसी को लकड़ी या अन्य वन संसाधनों की आवश्यकता है, तो उसे सामुदायिक वन पालन समिति से अनुमति लेनी होगी।
5. वन्य जीवों का संरक्षण अनिवार्य
कोई भी व्यक्ति किसी भी वन क्षेत्र या ग्राम सीमाना में वन्य जीवों को नहीं मारेगा।
ऐसा करने पर उसे आर्थिक, सामाजिक और शारीरिक दंड दिया जाएगा।
सख्त कार्रवाई का ऐलान
ग्राम सभा मंच, सामुदायिक वन पालन समिति, ग्राम प्रधान और अन्य ग्रामीण संयुक्त रूप से यह घोषणा करते हैं कि मार्च 2016 से इन नियमों को कठोरता से लागू किया जाएगा।
हम आप सभी से अनुरोध करते हैं कि इन दिशा-निर्देशों का पालन करें और अपने गांवों में इन्हें सख्ती से लागू करें।
– निवेदक:
प्रखंड स्तरीय ग्राम सभा मंच, कुचाई प्रखंड