हेलिकॉप्टर से पहुंचेंगे मेघालया गेस्ट हाउस, एक दिवसीय दौरे का कार्यक्रम तय
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी 7 अप्रैल को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला स्थित सरायकेला क्षेत्र में एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वे हेलिकॉप्टर से मेघाहातुबुरु पहुँचेंगे और सीधे सेल के मेघालया गेस्ट हाउस में उतरेंगे। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री सेल की किरीबुरु, मेघाहातुबुरु और गुआ खदानों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और वहीं सेल के उच्चाधिकारियों के साथ अहम बैठक भी करेंगे।
सेल के अधिकारी मौन, लेकिन तैयारियाँ तेज़
हालांकि इस्पात मंत्री के दौरे को लेकर सेल के किसी भी अधिकारी ने औपचारिक रूप से बयान नहीं दिया है, लेकिन अंदरखाने तैयारियाँ युद्धस्तर पर जारी हैं। सुरक्षा से लेकर बैठक की व्यवस्था तक सब कुछ दुरुस्त किया जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दौरा बेहद अहम है।
खदानों की लीज पर संकट, मंत्री की पहल से सुलझेगी गुत्थी?
सेल की प्रमुख खदानों में शामिल किरीबुरु का साउथ ब्लॉक और मेघाहातुबुरु का सेंटर ब्लॉक पिछले कई वर्षों से लीज विवाद में उलझे हुए हैं। इन खदानों की लीज अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, जिससे इन क्षेत्रों के खनन कार्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अगर यह मामला जल्द सुलझता नहीं है, तो इन खदानों का संचालन ठप हो सकता है, जिससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
मेघाहातुबुरु खदान की हालत और भी बदतर
खासकर मेघाहातुबुरु खदान की स्थिति तो और भी चिंताजनक है। यहां खनन कार्य लगभग ठप पड़ने की कगार पर है। स्थानीय कर्मचारियों और मजदूरों में भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में मंत्री कुमारस्वामी की यात्रा से उम्मीदें बंधी हैं कि कोई ठोस समाधान निकलकर सामने आएगा।
जनता को भी है बड़ी उम्मीदें: सौगात या घोषणा का इंतजार
स्थानीय जनता और खदान क्षेत्र के कर्मचारी मंत्री के दौरे से कई उम्मीदें लगाए बैठे हैं। लंबे समय से खदानों की स्थिति बदतर होती जा रही है। रोजगार के अवसर सिमटते जा रहे हैं और क्षेत्र का आर्थिक चक्र धीमा पड़ चुका है। ऐसे में लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि इस्पात मंत्री उनके लिए क्या सौगात लेकर आते हैं—क्या कोई लीज मंजूरी की घोषणा होगी, क्या खदानों को पुनर्जीवित करने की कोई योजना सामने आएगी?
सेल के भविष्य के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है यह दौरा
एच.डी. कुमारस्वामी का यह दौरा सेल और इसके अधीन संचालित खदानों के भविष्य को लेकर निर्णायक साबित हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मंत्री के हस्तक्षेप से लीज विवाद सुलझेगा, क्या खदानों का संचालन फिर से गति पकड़ेगा, और क्या स्थानीय लोगों को राहत की कोई सौगात मिलेगी।