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“ग्रामीण कार्य विभाग में ‘रजक राज’! भ्रष्टाचार की नई इबारत, अभियंता प्रमुख से भी ऊपर पहुंच गए राजेश रजक”- पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ।

पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई

वीरेन्द्र राम और संजीव लाल की राह पर चल पड़े राजेश रजक, करोड़ों की निविदा में चहेते ठेकेदारों को फायदा, टेंडर प्रक्रिया में खुला खेल – बंदरबांट की शिकायतों ने मचाई सनसनी।

रिपोर्ट : शैलेश सिंह

झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में भ्रष्टाचार अब संस्थागत रूप लेता नजर आ रहा है। पूर्व में कुख्यात हुए अभियंताओं – वीरेन्द्र राम और संजीव कुमार लाल की तरह अब एक और नाम तेजी से चर्चाओं में है – राजेश रजक। यह नाम अब विभागीय चर्चाओं में अभियंता प्रमुख से भी अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है। राजनीतिक संरक्षण, ऊंची पहुंच और नेटवर्क के बूते राजेश रजक ने विभाग की नीतियों को धता बताते हुए टेंडर प्रक्रिया को अपने कब्जे में कर लिया है। उक्त बातें पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई ने कहा।

कोल्हान प्रमंडल की निविदा में खुला भ्रष्टाचार

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि राजेश रजक द्वारा नियंत्रित टेंडर प्रक्रिया का सबसे ताजा उदाहरण कोल्हान प्रमंडल के चाईबासा डिविजन में देखने को मिला, जहां NIT NO.19/2024-2025/RWD/CHAIBASA के अंतर्गत हुई टेंडर प्रक्रिया में योग्य संवेदक को जानबूझकर अयोग्य घोषित कर दिया गया, और मनचाहे संवेदक को काम थमा दिया गया।

इसी तरह, स्पेशल रिपेयर योजना की निविदा (NIT NO – RWD/CBSA/STPKG/03/2024-2025) में भी खुल्लमखुल्ला पक्षपात हुआ। आरोहण बिल्डर द्वारा इस पर ग्रीवांस दायर करने के बाद भी अभियंता प्रमुख कार्यालय में बैठे श्री टोप्पो और राजेश रजक ने उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया।

अभियंता प्रमुख का पद खाली, राजेश रजक की चलती सत्ता

बड़कुंवर गागराई ने कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि अभियंता प्रमुख सेवा निवृत्त हुए महीनों बीत गए, लेकिन अब तक किसी योग्य अभियंता को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई। इससे जाहिर होता है कि विभाग की मंशा भ्रष्टाचार को संरक्षित करने की है। इस खाली पद का भरपूर फायदा उठाते हुए राजेश रजक ‘मुख्य अभियंता सरीखे ताकत’ के साथ विभाग चला रहे हैं।

कई करोड़ की योजनाओं में गड़बड़ी

सूत्रों के अनुसार, पांच करोड़ से अधिक की योजनाओं में संवेदकों के चयन में भारी अनियमितता बरती गई है। यही कारण है कि विभागीय टेंडरों को लेकर न्यायालयों में केसों की बाढ़ आ गई है। पूर्व मंत्री का मानना है कि “बीरेंद्र राम-संजीव लाल” जैसा कांड दोहराया जा सकता है।

मुख्य अभियंता से भी ऊपर पहुंच गए राजेश रजक

राजेश रजक वर्तमान में जमशेदपुर डिविजन में कार्यपालक अभियंता के पद पर पदस्थापित हैं। इसके साथ ही वह जिला प्रशासन के अधीन NREP और ITDA परियोजनाओं के प्रभारी भी हैं। इसके अलावा, वह मुख्य अभियंता कार्यालय में टेंडर कमिटी के सदस्य भी हैं, जिससे टेंडर प्रक्रिया पर उनका एकछत्र राज है।

बड़कुंवर गागराई अनुसार, राजेश रजक की पहुंच और पैरवी पूर्व के माफिया अभियंताओं – पारस सिंह, वीरेन्द्र राम, जेपी सिंह – से भी कहीं ऊपर है।

मंत्री को भी हटाने की चर्चा में राजेश रजक

एक सनसनीखेज चर्चा यह भी है कि राजेश रजक वर्तमान ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय को हटवाने तक की कोशिश में लगे हैं। हालिया विभागीय बैठक में यह बाते अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

ठेकेदारों को फायदा, विभाग में करोड़ों की बंदरबांट

राजेश रजक पर अपने खास ठेकेदारों को 50 करोड़ से अधिक की निविदा दिलाने का आरोप है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, 24 ऐसे संवेदकों की सूची सामने आई है, जिनके टेंडर को रजक ने अप्राकृतिक रूप से मंजूर कराया। यह सूची जन चेतना मंच ने सार्वजनिक की है, हालांकि इसकी अभी तक सरकारी पुष्टि नहीं हुई है।

पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई

राजनीतिक संज्ञान और जनहित याचिका की तैयारी

इस पूरे मामले पर भाजपा के पूर्व मंत्री बड़कुवर गगराई ने संज्ञान लिया है। उन्होंने टेंडर घोटाले, कमिशन वसूली और अभियंता प्रमुख की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दाखिल करने की घोषणा की है। उनके अनुसार, ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर प्रक्रिया एक रैकेट में तब्दील हो चुकी है, जहां पारदर्शिता का नामोनिशान नहीं है।

सवालों के घेरे में ग्रामीण कार्य विभाग

यह सवाल अब उठना स्वाभाविक है कि:

  • क्यों सिर्फ ग्रामीण कार्य विभाग में ही हर बार घोटाले सामने आते हैं?
  • क्यों अभियंता प्रमुख की कुर्सी महीनों तक खाली रखी जाती है?
  • आखिर क्यों तकनीकी विभागों की निगरानी नहीं हो रही?

राजेश रजक की बढ़ती ताकत, उनकी संदिग्ध गतिविधियाँ और टेंडर प्रक्रिया में पक्षपात – झारखंड की विकास योजनाओं की लूट का प्रतीक बनती जा रही हैं। यह सिर्फ एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि पूरे विभागीय तंत्र की गिरावट और सड़ांध का संकेत है।

निष्कर्ष:

राजेश रजक के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की स्वतंत्र और न्यायिक जांच अब अनिवार्य हो गई है। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो झारखंड के विकास संसाधन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएंगे, और राज्य की जनता को केवल उपेक्षा और लूट की विरासत मिलेगी। जनता, विपक्ष और मीडिया को अब इस मुद्दे को गंभीरता से उठाना चाहिए, ताकि ‘रजक राज’ जैसे तंत्र को खत्म किया जा सके।

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