पीड़ितों ने प्रबंधन से लगाई मदद की गुहार, प्रबंधन ने दी सफाई
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
मेघाहातुबुरु खदान प्रबंधन ने 18 मार्च की शाम लगभग 4 बजे न्यू कैंप (टाइप-2 आवासीय क्षेत्र) की बिजली आपूर्ति स्थायी रूप से काट दी। इस निर्णय से पिछले 15-20 वर्षों से वहां रह रहे लगभग 40-50 परिवारों में अफरा-तफरी मच गई। गर्मी के मौसम में अंधेरे में रहने को मजबूर इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित हो रही है।
झामुमो नेताओं से मिले पीड़ित, समस्या समाधान की मांग
न्यू कैंप के निवासियों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नोवामुंडी प्रखंड सचिव आलोक तोपनो एवं प्रखंड संगठन सचिव शमशाद आलम से मिलकर अपनी समस्या रखी। इसके बाद उनके नेतृत्व में पीड़ितों ने मेघाहातुबुरु के सीजीएम आर.पी. सेलबम से मुलाकात कर सहयोग की अपील की।
प्रबंधन ने दी सफाई, कहा—हम कुछ नहीं कर सकते
सीजीएम आर.पी. सेलबम ने स्पष्ट किया कि न्यू कैंप में अब कोई भी सेलकर्मी नहीं रहता है। उन्होंने बताया कि सेल इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है, जिसके तहत पौधारोपण और अन्य कार्य किए जाने हैं। अवैध रूप से रह रहे लोगों को कई बार नोटिस देकर आवास खाली करने के लिए कहा गया था, इसलिए अब इस मामले में कोई राहत नहीं दी जा सकती।
झामुमो नेताओं ने जताई नाराजगी, सरकार से हस्तक्षेप की मांग
आलोक तोपनो और शमशाद आलम ने प्रबंधन के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यू कैंप में रह रहे लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेल प्रबंधन की सेवा करते आए हैं। इनमें से कई लोग ठेका मजदूर हैं, तो कुछ दुकानदार जो सेल कर्मियों को सुविधाएं प्रदान कर रहे थे।
उन्होंने प्रबंधन से मांग की कि इन परिवारों को जबरन हटाने के बजाय, मेघाहातुबुरु टाउनशिप के खाली पड़े आवासों में बसाने की व्यवस्था की जाए। नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों से स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने के बजाय बाहरी लोगों को नौकरी दी जा रही है, जिससे यह समस्या उत्पन्न हुई है।
प्रबंधन पर लगाया दोहरा रवैया अपनाने का आरोप
नेताओं ने कहा कि जब सेल को ठेका मजदूरों की जरूरत थी, तब प्रबंधन ने आंखें मूंदकर इन लोगों को सेल आवासों में बसने दिया, लेकिन अब उन्हें बेघर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इन परिवारों को असामाजिक तत्व मानने के बजाय, उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।
मामले को सरकार तक ले जाने की तैयारी
आलोक तोपनो और शमशाद आलम ने ऐलान किया कि इस मामले को राज्य के मंत्री दीपक बिरुवा, सांसद जोबा माझी और विधायक सोनाराम सिंकु के अलावा झारखंड सरकार तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इन गरीब परिवारों के लिए कोई ठोस समाधान निकाला जा सके।