SHAILESH SINGH :-
15 महीने से राशन नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने निर्दलीय प्रत्याशी को बनाया बंधक
झारखंड के सारंडा क्षेत्र के कुम्बिया, चुर्गी, दुबील, ममार जैसे गांवों के ग्रामीणों ने 15 महीनों से राशन न मिलने के कारण अपना आक्रोश जाहिर किया। इस आक्रोश का केंद्र जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी और झारखंड आंदोलनकारी मंगल सिंह बोबोंगा बने, जिन्हें कुछ समय के लिए कुम्बिया गांव में बंधक बना लिया गया। हालांकि, मनोहरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से बातचीत के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप: 15 महीनों से राशन नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि वे सभी राशन कार्डधारी हैं, लेकिन सरकार ने पिछले 15 महीनों से राशन नहीं दिया। इस समस्या को लेकर उन्होंने कुछ महीने पहले सलाई चौक पर सड़क जाम किया था। उस समय मनोहरपुर के तत्कालीन बीडीओ शक्तिकुंज ने उन्हें आश्वासन दिया था कि 15 दिनों के भीतर बकाया राशन दे दिया जाएगा। लेकिन यह आश्वासन केवल वादे तक ही सीमित रहा। आज तक ग्रामीणों को उनका बकाया राशन नहीं मिला।
नेताओं के खिलाफ नाराजगी
ग्रामीणों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “जब सरकार और प्रशासन हमें राशन तक नहीं दे सकती, तो कोई भी नेता हमारे गांवों में वोट मांगने कैसे आ सकता है?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगली बार अगर कोई नेता वोट मांगने आया, तो उसे विरोध का सामना करना पड़ेगा।
मंगल सिंह बोबोंगा का बयान
मंगल सिंह बोबोंगा ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाया गया यह कदम झारखंड और केंद्र सरकार की नाकामी का प्रतीक है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इसके लिए पूर्व सांसद गीता कोड़ा और विधायक सोनाराम सिंकु मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। उनके मुताबिक, “तत्कालीन सांसद और विधायक होने के बावजूद उन्होंने ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान नहीं किया।”
बोबोंगा ने ग्रामीणों के आक्रोश को जायज ठहराया और कहा कि यह सरकार की व्यवस्था के खिलाफ उनकी आवाज को बुलंद करने का तरीका है। उन्होंने मनोहरपुर के बीडीओ से फोन पर बात की, जिसमें बीडीओ ने बताया कि पहले एलॉटमेंट के तहत राशन दिया गया था और दूसरा एलॉटमेंट आने पर शेष राशन दिया जाएगा। हालांकि, ममार के ग्रामीणों ने कहा कि 15 महीनों में उन्हें केवल 5-5 किलो राशन ही मिला है।
ग्रामीणों का अगला कदम
ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी राशन संबंधी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे भविष्य में किसी भी प्रत्याशी को अपने गांवों में घुसने नहीं देंगे। उनका यह रुख सरकार और राजनीतिक दलों के प्रति उनकी गहरी असंतोष की अभिव्यक्ति है।
झारखंड में राशन संकट: समस्या की जड़ें
झारखंड में राशन वितरण की समस्या कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, राज्य के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें आई हैं, जहां कार्डधारियों को उनके हक का राशन नहीं मिला।
मुख्य कारण:
- सरकारी सिस्टम की खामियां:
- राशन वितरण में पारदर्शिता की कमी।
- समय पर राशन का आवंटन और वितरण न होना।
- भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका।
- डिजिटल सिस्टम की असफलता:
- आधार कार्ड और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण में समस्याएं।
- कई ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी, जिससे राशन वितरण प्रभावित होता है।
- राजनीतिक उपेक्षा:
- स्थानीय नेताओं द्वारा जनहित के मुद्दों की अनदेखी।
- चुनावी वादे केवल दिखावा बनकर रह जाते हैं।
सरकार और प्रशासन का रुख
राज्य और केंद्र सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को सुधारने के कई प्रयास किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका असर दिखना बाकी है। मनोहरपुर के बीडीओ द्वारा किए गए वादे से भी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं।
आवश्यक सुधार:
- पारदर्शी वितरण प्रणाली:
- राशन वितरण की निगरानी के लिए एक पारदर्शी तंत्र।
- शिकायत निवारण के लिए स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई।
- डिजिटल सुधार:
- तकनीकी खामियों को दूर करना।
- ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना।
- स्थानीय प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी:
- सांसद और विधायकों को अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए जवाबदेह बनाना।
निष्कर्ष
कुम्बिया और आसपास के गांवों में राशन की समस्या ने एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे को उजागर किया है। यह केवल राशन का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीणों की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी का परिणाम है।
सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे इस समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करें। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी स्थितियां न उत्पन्न हों। ग्रामीणों का आक्रोश एक चेतावनी है कि यदि उनकी जरूरतें पूरी नहीं की गईं, तो इसका प्रभाव आगामी चुनावों पर भी पड़ेगा।