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प्रेम, सद्भाव और समरसता का प्रतीक बना मुनगा छुईं, बाजार भाव में भारी गिरावट

गुवा क्षेत्र में सहजन की अधिक पैदावार से कीमतों में आई भारी गिरावट

गुवा संवाददाता।
गुवा क्षेत्र में सहजन के फल, जिसे स्थानीय भाषा में मुनगा छुईं या सुट्टी कहा जाता है, के बाजार भाव में इस वर्ष भारी गिरावट दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जहां इसका भाव 200 रुपये प्रति किलो था, वहीं इस बार यह महज 30 रुपये किलो पर सिमट गया है। इसका मुख्य कारण इस वर्ष मुनगा की बंपर पैदावार बताया जा रहा है।

तुलसी-नीम के बाद सबसे ज्यादा पसंदीदा घरेलू पौधा

गुवा और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में सहजन के पेड़ तुलसी और नीम के बाद सबसे ज्यादा लगाए जाने वाले घरेलू पौधों में शुमार हैं। लगभग हर घर के बाहर या आंगन में सहजन का पेड़ देखा जा सकता है। लोग इसे सिर्फ औषधीय गुणों के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक मानकर भी लगाते हैं।

छुईं के आदान-प्रदान से जुड़ी है भावनात्मक मान्यता

स्थानीय पंडित नागेंद्र पाठक बताते हैं कि मुनगा के फल, फूल और पत्तों को मिल-बांटकर खाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। मान्यता है कि ऐसा करने से पेड़ में मिठास बढ़ती है। हालांकि इस बात की कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं है, पर यह सामाजिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। इस आदान-प्रदान की परंपरा ने जात-पात और सामाजिक भेदभाव को मिटाने में अहम भूमिका निभाई है।

गली-मोहल्लों में अब भी जीवित है साझा संस्कृति

आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग अपने मोहल्ले में एक-दूसरे को मुनगा छुईं भेंट करते हैं। यह सिर्फ एक फल का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और समरसता की सौगात है। यह परंपरा सामाजिक जुड़ाव की मिसाल पेश करती है, जिसे पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है।

सेहत का खजाना: प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर

सहजन को पोषण का भंडार माना जाता है। इसके फल और पत्तियों में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन A और C प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेद में इसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए उपयोगी बताया गया है। इसलिए बाजार में इसकी मांग बनी रहती है, हालांकि इस बार पैदावार अधिक होने से कीमतों में गिरावट आई है।

बाजार में गिरा भाव, लेकिन बढ़ा सामाजिक मूल्य

जहां एक ओर बाजार में छुईं की कीमतों में भारी गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर यह फल सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का जरिया बन गया है। आर्थिक रूप से भले ही यह लाभदायक न हो, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसकी अहमियत लगातार बढ़ रही है।

निष्कर्ष: मुनगा सिर्फ एक फल नहीं, सामाजिक एकता का प्रतीक

गुवा क्षेत्र में मुनगा छुईं केवल एक घरेलू फल नहीं, बल्कि प्रेम, सहयोग और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है। इसकी सांस्कृतिक और औषधीय महत्ता ने इसे लोगों के दिलों में एक विशेष स्थान दिलाया है। भले ही बाजार भाव में गिरावट आई हो, पर इसकी सामाजिक कीमत कहीं ज्यादा ऊंची है।

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