सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद माफिया कर रहे तस्करी, प्रशासन बेबस
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड के मनोहरपुर थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। माफिया रात के अंधेरे में हाईवा और बड़े मालवाहक वाहनों के जरिए बालू की तस्करी कर रहे हैं। यह बालू मनोहरपुर से छोटानागरा, गुआ, किरीबुरु होते हुए झारखंड और ओडिशा के विभिन्न शहरों में भेजा जा रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सारंडा रिजर्व वन क्षेत्र में सूर्यास्त के बाद भारी वाहनों के परिचालन पर पूर्णतः प्रतिबंध है। इसके बावजूद, रातभर बालू से लदे ट्रक और अन्य भारी मालवाहक गाड़ियां यहां की सड़कों पर बेरोकटोक दौड़ रही हैं। प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लग पा रही है।

सख्ती के बावजूद सारंडा से जारी है बालू तस्करी
अवैध खनन पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने सैडल में चेकनाका लगाया है। लेकिन यह चेकनाका भी बालू माफियाओं को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। कई बार जब्त किए गए ट्रकों और कानूनी कार्रवाइयों के बावजूद बालू तस्करी की गति धीमी नहीं हुई है।
झारखंड में पिछले कई वर्षों से बालू घाट की नीलामी नहीं हुई है, जिसके कारण कानूनी रूप से नदियों से बालू उठाव प्रतिबंधित है। इसके बावजूद बालू माफिया नदियों से अवैध खनन कर सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं। साथ ही, नदियों के अस्तित्व और पर्यावरण को भी भारी क्षति हो रही है।
प्रशासन की नाकामी, माफियाओं के हौसले बुलंद
बालू की तस्करी रोकने के लिए प्रशासन ने खनन विभाग, वन विभाग, पुलिस और स्थानीय अधिकारियों की संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया है। लेकिन अब तक यह टास्क फोर्स भी बालू माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने में असफल रही है।
इस अवैध धंधे से जुड़े माफिया इतने प्रभावशाली हैं कि वे प्रशासन की सख्ती को भी ठेंगा दिखा रहे हैं। कई बार प्रशासन ने ट्रकों को जब्त किया, चालान काटे और छापेमारी की, लेकिन कुछ दिन बाद ही यह गोरखधंधा फिर से शुरू हो जाता है।
सरकार को राजस्व का भारी नुकसान, पर्यावरण को खतरा
बालू तस्करी न केवल सरकारी राजस्व को प्रभावित कर रही है, बल्कि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह भी बिगड़ रहा है। अवैध खनन के कारण नदी का जलस्तर घट रहा है, मिट्टी का कटाव बढ़ रहा है और जलवायु पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अवैध खनन पर जल्द रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में जल संकट और मिट्टी के कटाव की समस्या और गंभीर हो सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह बालू घाटों की जल्द से जल्द नीलामी करे और अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए।
आगे क्या? अवैध खनन रोकने के लिए क्या हो सकता है समाधान?
सख्त निगरानी और निगरानी तंत्र में सुधार
अवैध खनन वाले क्षेत्रों में CCTV कैमरे और ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी बढ़ाई जाए।
हाईवे और मुख्य सड़कों पर चेक पोस्ट की संख्या बढ़ाई जाए।
प्रशासनिक सख्ती और जिम्मेदारी तय करना
जिन अधिकारियों की लापरवाही से बालू तस्करी हो रही है, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
पुलिस, वन विभाग और खनन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर नियमित छापेमारी की जाए।
स्थानीय लोगों को जागरूक करना
अवैध खनन से होने वाले नुकसान के बारे में गांवों और कस्बों में जागरूकता अभियान चलाया जाए।
स्थानीय लोगों को इस अवैध धंधे से दूर रहने के लिए प्रशासनिक मदद दी जाए।
नीलामी प्रक्रिया में तेजी
सरकार को जल्द से जल्द बालू घाटों की नीलामी करनी चाहिए ताकि वैध तरीके से बालू खनन हो सके और राजस्व की हानि न हो।
निष्कर्ष
मनोहरपुर थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन प्राकृतिक संसाधनों की लूट और सरकारी राजस्व की हानि का गंभीर मामला है। प्रशासन को इस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि नदियों और पर्यावरण को बचाया जा सके।
यदि यह सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो झारखंड की नदियां और पर्यावरण गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए कब और कितना प्रभावी कदम उठाता है।