रिपोर्ट: शैलेश सिंह
झारखंड के नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। गर्मी के आगमन के साथ ही पानी की किल्लत ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। सरकार ने पेयजल विभाग एवं डीएमएफटी फंड के तहत जलापूर्ति योजनाएं, सोलर चालित जलमीनार और अन्य परियोजनाएं शुरू की थीं, लेकिन अधिकतर योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही ने बिगाड़ी स्थिति
छोटानागरा पंचायत के 10 गांवों और उनके विभिन्न टोलों में “हर घर नल योजना” के तहत पानी पहुंचाने का लक्ष्य था, लेकिन आज भी कई गांवों तक जलापूर्ति नहीं हो सकी। इसी तरह, राकाडबरा, बढुईया, धर्मरगुटू, जोजोपी और राजाबेड़ा गांवों में सोलर जलमीनार लगाकर जलापूर्ति की योजना बनाई गई थी। हालांकि, कई स्थानों पर जलमीनार और समरसेबल पंप तो लगा दिए गए, लेकिन अब तक पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
लापरवाही का आलम यह है कि राकाडबरा गांव में सोलर प्लेट और मोटर आज भी एक घर में पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
छोटानागरा पंचायत की मुखिया मुन्नी देवगम और जोजोगुटू मुंडा कानूराम देवगम ने बताया कि राकाडबरा, बढुईया और धर्मरगुटू गांवों में स्थापित सोलर जलमीनारों को चालू कर ग्रामीणों को जल्द से जल्द पानी उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अधिकारियों से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
यह समस्या सिर्फ छोटानागरा पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि गंगदा, दीघा और लाईलोर पंचायतों के ग्रामीण भी लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे हैं। गंगदा पंचायत के ग्रामीणों ने मुखिया राजू सांडिल के नेतृत्व में दो बार सड़क जाम कर आंदोलन किया। वहीं, राजनीतिज्ञ सुशील बारला भी मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय में कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं और उपायुक्त को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
जरूरत ठोस कार्रवाई की
सरकारी योजनाओं में गड़बड़ियों के कारण ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। अब देखना होगा कि सरकार इस गंभीर समस्या का समाधान कब तक निकालती है।