ग्रामवासियों ने जताया आभार, कहा- जीवन रक्षक साबित हो रहा है यह प्रयास
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सीआरपीएफ की 26वीं वाहिनी द्वारा अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र छोटानागरा थाना अंतर्गत ग्राम बलिबा में एक महत्वपूर्ण सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का नेतृत्व कमाण्डेन्ट श्री राजीव रंजन के दिशा-निर्देशन में 26वीं वाहिनी के डॉक्टर ऋषभ शेखर (सहायक कमांडेंट) ने किया। यह पहल ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ।
इस चिकित्सा शिविर का आयोजन सारंडा के सुदूरवर्ती एवं स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित ग्राम बलिबा में किया गया। शिविर के दौरान गांव के लगभग 118 स्थानीय एवं जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य जांच और मुफ्त दवाइयों की सुविधा प्रदान की गई। ग्रामीणों को बुखार, बदन दर्द, कुपोषण, एनीमिया जैसी सामान्य लेकिन गंभीर बीमारियों के लिए जरूरी दवाइयाँ दी गईं।
ग्रामीणों का मिला भरपूर सहयोग
इस आयोजन को सफल बनाने में ग्रामवासियों का भरपूर सहयोग मिला। गांव के मींडा, मुखिया, स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत अन्य स्थानीय लोग शिविर में उपस्थित रहे और सभी ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य शिविर के प्रति उत्साह दिखाया और बड़ी संख्या में लोग अपनी जांच करवाने पहुंचे।
ग्रामवासियों ने सराहा सीआरपीएफ का प्रयास
स्वास्थ्य शिविर के आयोजन को लेकर गांव के लोगों ने 26वीं वाहिनी के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में इस प्रकार का आयोजन वास्तव में प्रशंसनीय है। जहां एक ओर सरकारी सुविधाएं पहुंचना कठिन होता है, वहीं सीआरपीएफ की यह पहल लोगों के जीवन में राहत लेकर आई है।
सिविक एक्शन प्रोग्राम से बढ़ रहा है भरोसा
इस तरह के कार्यक्रमों से न केवल ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है, बल्कि सुरक्षा बलों के प्रति उनका भरोसा भी मजबूत हो रहा है। सिविक एक्शन प्रोग्राम के माध्यम से सीआरपीएफ न केवल सुरक्षा का दायित्व निभा रही है, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व को भी बखूबी निभा रही है।
इस पहल से यह स्पष्ट हो गया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सीआरपीएफ की उपस्थिति केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी उनकी भूमिका अहम होती जा रही है।
ग्रामवासियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन होते रहेंगे, जिससे उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो सके।