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आदिवासी युवाओं के भविष्य पर संकट: स्थानीय खदानों में नियुक्ति प्रक्रिया वर्षों से ठप। नियोजनालय के माध्यम से तृतीय व चतुर्थ श्रेणी की नियुक्ति नहीं, हाईकोर्ट के निर्देश भी नजरअंदाज

 

वर्षों से अटकी नियुक्ति प्रक्रिया ने बढ़ाई बेरोजगारी

रिपोर्ट: शैलेश सिंह
सिंहभूम (पश्चिम) जिले के किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुआ और चिरिया लौह अयस्क खदानों में बीते कई वर्षों से तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थानीय नियोजनालय के माध्यम से कोई नियुक्ति नहीं हो सकी है। जबकि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि इन पदों पर नियुक्ति स्थानीय स्तर पर की जानी चाहिए।

आदिवासी बहुल क्षेत्र में रोजगार का संकट गहराया

यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है और विकास की दौड़ में पहले से ही पिछड़ा हुआ माना जाता है। बावजूद इसके, रोजगार की सबसे बड़ी संभावना मानी जाने वाली खदानों में स्थानीय बेरोजगारों को अवसर नहीं मिल पा रहा है।

तकनीकी शिक्षा लेकर भी दर-दर भटक रहे आदिवासी युवा

स्थानीय आदिवासी युवा बड़ी संख्या में आईटीआई, डिप्लोमा एवं अन्य तकनीकी शिक्षाएं प्राप्त कर चुके हैं ताकि उन्हें खदानों में रोजगार मिल सके। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया बंद होने के कारण वे अपने घरों में बेरोजगार बैठे हैं।

पलायन बनी विवशता, अन्य राज्यों का रुख कर रहे आदिवासी युवा

स्थानीय रोजगार के अभाव में आदिवासी युवा अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को विवश हैं। यह न सिर्फ इस क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रहा है, बल्कि विकास की गति को भी रोक रहा है।

जनहित में तत्काल नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग

स्थानीय लोगों का आग्रह है कि किरीबुरू, मेघाहातुबुरू, गुआ और चिरिया के लौह अयस्क खदानों में कम से कम 250-250 पदों पर तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नियुक्ति प्रक्रिया अविलंब प्रारंभ की जाए। इससे न केवल क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि आदिवासी समाज को भी सामाजिक-आर्थिक संबल मिलेगा।

प्रशासन और कंपनियों से गंभीर पहल की अपेक्षा

इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर उदासीनता और खदान प्रबंधन की लापरवाही के कारण हजारों युवा वर्षों से ठगे जा रहे हैं। जरूरत है कि संबंधित अधिकारी, विभाग और खनन कंपनियां इस विषय को गंभीरता से लें और माननीय न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया आरंभ करें।

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