अहले सुबह गूंजे छठ मईया के गीत
रिपोर्ट: शैलेश सिंह
किरीबुरु स्थित लोकेश्वरनाथ धाम तालाब घाट पर शुक्रवार सुबह उगते सूर्य को अर्ध्य देने के साथ चैती छठ पर्व का समापन हुआ। अहले सुबह ही छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं की टोली पूजा की सामग्री, दीप, फल, ठेकुआ और अन्य पारंपरिक चीजों से भरे दउरा के साथ घाट की ओर रवाना हुई। महिलाओं ने छठ मईया के लोकगीत गाते हुए घाट तक की पदयात्रा पूरी की।
डुबकी लगाकर दी सूर्य को अर्ध्य
तालाब घाट पर पहुंचने के बाद व्रतियों ने पवित्र स्नान कर तालाब में डुबकी लगाई। जैसे ही पूर्व दिशा में सूर्यदेव के दर्शन हुए, व्रतियों ने दूध और गंगाजल से अर्ध्य अर्पित किया। परिवार के सभी सदस्य और अन्य श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने। पूजा की विशेष तैयारी और विधिवत अर्ध्य से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
प्रसाद वितरण के साथ बढ़ी खुशियों की मिठास
पूजा-अर्चना के बाद घाट पर उपस्थित लोगों को छठ का पारंपरिक प्रसाद जैसे ठेकुआ, फल और अन्य मिष्ठान वितरित किया गया। व्रति महिलाओं ने व्रत की समाप्ति के बाद सभी को प्रसाद देकर पर्व की खुशी साझा की। इस मौके पर घाट पर मेल-जोल और भाईचारे का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
शांति और श्रद्धा के बीच सम्पन्न हुआ पर्व
पूरे कार्यक्रम के दौरान घाट पर सुरक्षा और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की गई थी। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों ने घाट पर साफ-सफाई बनाए रखी और व्रतियों की सहायता की। श्रद्धा, संयम और परंपरा का अनुपम संगम इस वर्ष के चैती छठ को विशेष बना गया।
परिवार और समाज की खुशहाली के लिए मांगी मन्नतें
व्रतियों ने सूर्य देव और छठ मईया से परिवार की सुख-शांति, संतान की सलामती और समाज की उन्नति की कामना की। चार दिवसीय यह पर्व कठोर तप, संयम और आस्था का प्रतीक माना जाता है, जो साल में दो बार—चैती और कार्तिक मास में मनाया जाता है। इस बार भी छठ पर्व ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और एकता के रंग में रंग दिया।