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फूड फोर्टीफिकेशन को लेकर कोल्हान विश्वविद्यालय में हुआ जागरूकता प्रशिक्षण। कुपोषण, एनीमिया और स्टंटिंग से निपटने के लिए उठाया गया अहम कदम

 

चाईबासा में आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

रिपोर्ट: शैलेश सिंह
खाद्य सुरक्षा विभाग, पश्चिमी सिंहभूम की ओर से गुरुवार, 27 मार्च को कोल्हान विश्वविद्यालय के सभागार में “फूड फोर्टीफिकेशन” (खाद्य पोषण संवर्धन) पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, छात्र, आंगनवाड़ी सेविकाएं और जन वितरण प्रणाली से जुड़े अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि लक्ष्मी सुरीन ने की पहल की सराहना

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि चाईबासा जिला परिषद की अध्यक्ष माननीय लक्ष्मी सुरीन थीं। उन्होंने फूड फोर्टीफिकेशन को कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने के लिए एक प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन श्री सुशांतो मांझी, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री अभिषेक आनंद एवं कोल्हान विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर श्री बसंत शुभंकर ने प्रतिभाग किया। प्रो. शुभंकर ने फूड फोर्टीफिकेशन के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे विटामिन और खनिजों की कमी को दूर करने में यह तकनीक कारगर है।

आंगनवाड़ी सेविकाएं और पीडीएस प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर लिया भाग

प्रशिक्षण कार्यक्रम में आंगनवाड़ी की सेविकाएं, पीडीएस गोदाम के प्रबंधक, मार्केटिंग अधिकारियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को फूड फोर्टीफिकेशन की प्रक्रिया, उसके लाभ, सावधानियों एवं प्रचार-प्रसार के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।

फोर्टीफिकेशन से जुड़े मिथकों पर भी हुई चर्चा

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी श्री अभिषेक आनंद ने बताया कि फोर्टीफिकेशन से जुड़ी कई भ्रांतियाँ लोगों में फैली हुई हैं। उन्होंने खासकर “प्लास्टिक चावल” को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया और बताया कि यह वास्तव में फोर्टीफाइड चावल है, जिसे पोषक तत्वों से समृद्ध किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने देशभर के सभी जन वितरण प्रणाली की दुकानों में मिलने वाले चावल को फोर्टीफाइड करने का निर्देश दिया है।

स्वस्थ जीवन के लिए संपूर्ण पोषण की जरूरत

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि संतुलित आहार, स्वच्छता, भोजन की गुणवत्ता और नियमित स्वास्थ्य जांच किस तरह एक व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं। कुपोषण, एनीमिया और स्टंटिंग जैसे मुद्दे पश्चिमी सिंहभूम जिले के लिए बड़ी चुनौती हैं और फोर्टीफिकेशन इस दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

फूड फोर्टीफिकेशन से मिलेगा जन स्वास्थ्य को बल

कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल जागरूकता फैलाना था, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाना भी था। प्रशिक्षकों ने यह विश्वास जताया कि यदि फोर्टीफाइड खाद्य सामग्री को जन-जन तक पहुंचाया जाए और इसके महत्व को समझाया जाए, तो जिले को कुपोषण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जल्द ही मुक्ति मिल सकती है।

समापन पर किया गया जागरूकता का आह्वान

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने क्षेत्रों में फूड फोर्टीफिकेशन के संदेश को फैलाने और लोगों में जागरूकता लाने का आह्वान किया गया। साथ ही यह भी अपील की गई कि हर व्यक्ति अपने भोजन में पोषक तत्वों की उपस्थिति को सुनिश्चित करे ताकि स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सके।

अगर चाहें तो मैं इसे न्यूज रिपोर्ट के फॉर्मेट में और भी विस्तार से लिख सकता हूँ।

 

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