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स्कूली बच्चों के भोजन में घोटाला: शिक्षकों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग

SHAILESH SINGH:- जगन्नाथपुर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रधान शिक्षक कक्षाओं में पढ़ाने के बजाय एमडीएम से लाभ उठाने की योजनाओं में व्यस्त रहते हैं। रिपोर्ट तैयार करने के नाम पर वे कार्यालय में ही समय बिताते हैं और जानबूझकर स्कूल का रूटीन तक नहीं बनाते, ताकि पढ़ाई की जिम्मेदारी न उठानी पड़े।

 

खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल
भाजपा नेताओं ने दावा किया कि एमडीएम में इस्तेमाल होने वाले तेल, मसाले और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। अंडा दिवस के दिन उपस्थिति में जबरदस्त बढ़ोतरी की शिकायतें मिल रही हैं। रसोइयों का कहना है कि स्कूलों में बेहद घटिया स्तर का सरसों तेल इस्तेमाल किया जा रहा है। तेल को कढ़ाई में डालते ही झाग उठने लगता है और जले हुए मोबिल की तरह बदबू आती है। बाजार में मध्यम गुणवत्ता का सरसों तेल ₹160-₹170 प्रति लीटर की दर से मिल रहा है, लेकिन स्कूलों में सिर्फ ₹90-₹100 प्रति लीटर का घटिया तेल इस्तेमाल हो रहा है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।

 

बच्चों को मिल रहा अधूरा पोषण

अधिकांश स्कूलों में आधा अंडा परोसा जा रहा है। टमाटर, लहसुन और अदरक जैसी आवश्यक सामग्रियों का उपयोग बेहद कम किया जा रहा है, जिससे बच्चों को उचित पोषण नहीं मिल पा रहा। प्याज तक सीमित मात्रा में दिया जा रहा है। भाजपा प्रखंड अध्यक्ष राई भूमिज ने सरकार पर आरोप लगाया कि शिक्षकों को उच्च वेतन देने के बावजूद उनसे लिपिकीय कार्य करवाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

भाजपा का विरोध और जांच की मांग

भाजपा नेताओं ने जिला प्रशासन से स्कूलों में उपयोग हो रहे तेल, मसालों और अन्य खाद्य सामग्रियों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। स्वास्थ्य विभाग और खाद्य निरीक्षक द्वारा नियमित रूप से स्कूलों से नमूने लेकर परीक्षण करवाने की भी मांग उठाई गई है।

सरकार को चेतावनी

भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि स्कूली बच्चों के भोजन की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ और प्रधान शिक्षकों की मनमानी जारी रही, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। उन्होंने सरकार से एमडीएम प्रणाली में व्यापक सुधार लाने और शिक्षकों को पढ़ाई से इतर कार्यों में लगाने पर रोक लगाने की मांग की।

विद्यालयों में कुपोषण और अनियमितताओं को लेकर उठे इन गंभीर आरोपों के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है।

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